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  • Writer's pictureSushil Rawal

एक तांत्रिक जिसका नाम ब्रिटैन की प्रधानमंत्री तक से जुड़ा – चंद्रा स्वामी 

तांत्रिक नाम सुनते ही दिमाग में छवि बनती है भूत प्रेत जादू टोना ऐसी सभी चीजों की। लेकिन जिस तांत्रिक के बारे में बताने जा रहा हूँ उसका लेना देना था राजनेताओ से।

पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश अपनी किताब ब्रिंग एंड बैक में जिक्र करते है 1991 का साल था देश में आर्थिक संकट के बादल थे और नरशिमा राव ने आर्थिक सुधारो की घोषणा की लेकिन फॉरेन रिसर्व खाली होने के कगार पे था।

ऐसे में एक दिन राव अपने गुरु चंद्रा स्वामी से मिलने गए और चंद्रा स्वामी ने राव की हाथ की लकीरो को देखते हुए कहा की मित्र चिंता मत करो मेने अपने दोस्त ब्रुनेई के सुल्तान से बात की है उन्होंने कहा है की जितना पैसा चाहिए उधार देंगे बिना एक भी सवाल पूछे। राव ने इस बार को सीरियसली ले लिया और तुरंत एक प्लेन तैयार किया गया ब्रुनेई से माल मंगवाने के लिए। जब बाकि नेताओ और अफसरों को पता चला तो उन्होंने राव को समझाया की ऐसा नहीं हो सकता देश विदेश का मामला है नाक कट सकती है।

चंद्रा स्वामी की शरुआत होती है 1948 से उनके शरुआती जीवन के बारे में कम जानकारी उपलब्ध है लेकिन उनके अनुसार बचपन से ही उनका मन तंत्र साधना में लगा हुआ था। और उन्होंने कम उम्र में घर छोड़ कर जंगल की चरण ली और कई साल साधना करने के बाद 23 साल की उम्र में वो बनारस पहुंचते है। और बनारस में धीरे धीरे ज्योतिषी में अपना नाम चमकाया और इसी दौर में कई नेता उनके शिष्य बने। 

pv narasimha rao

pv narasimha rao

इन्ही में से एक थे PV नरशिमा राव और आगे चल के देश के प्रधानमंत्री बने। राव 1971 में आंध्र प्रदेश के मुख्य मंत्री भी थे उसी दौरान राव की मुलाकात चंद्रा स्वामी से हुयी थी और वो राव के साथ नजर आने लगे थे। धीरे धीरे चंद्रा स्वामी का रिश्ता और नेताओ से जुड़ता गय। इंदिरा गाँधी में उन्हें आश्रम बनाने के लिए जमीं मुहैया करवाई।

विदेशी नेताओ पे स्वामी अपनी धाक कैसे जमाते थे इसको लेके पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने अपनी किताब वाकिंग विथ लायंस में लिखा है।  1975 का साल था नटवर सिंह इंग्लैंड में भारतीय राजदूत के पद पर थे। इंदिरा के करीबी और पूर्व राज्य सभा सांसद यशपाल कपूर ने चंद्रा स्वामी से कहा था की लंदन जाओ तो नटवर सिंह से मिलकर आना।

Natwar Singh

Natwar Singh

चंद्रा स्वामी इंडिया हाउस में नटवर सिंह से मिलने पहुंचे और बातो ही बातो में उन्होंने मार्गरेट थ्रेचर से मिलने की इच्छा जता दी। मार्गरेट थ्रेचर उस समय इंग्लैंड की कंज़र्वेटिव पार्टी की पहली महिला अध्यक्ष बनी थी। चंद्रा स्वामी की ये बात सुन के नटवर सिंह को कुछ आचर्य हुआ फिर भी उन्होंने मार्गरेट थ्रेचर तक ये बात पंहुचा दी। थ्रेचर को भी ये बात अटपटी लगी लेकिन मार्गरेट थ्रेचर जो की इंदिरा गाँधी से प्रभावित थी और उन्हें पता चला की स्वामी इंदिरा के करीबी है तो उन्होंने दस मिनिट की मीटिंग का टाइम दे दिया।

स्वामी जब थ्रेचर से मिलने पहुंचे तो उनके माथे में बड़ा तिलक रुद्राक्ष की माला और गले में ढेर सारी मालाये थी और हाथ में एक लाठी थी। कमाल की बात ये थी की स्वामी को इंग्लिश बोलनी नहीं आती थी इसलिए नटवर सिंह उस दिन ट्रांसलेटर की भूमिका में थे। बात शरू होते ही चंद्रा स्वामी ने दो कागज मंगवाए। पहले कागज पे स्वामी ने ऊपर से निचे और दाये से बाये लाइन खींच दी और दूसरे कागज के पांच टुकड़े करके थ्रेचर को दिए। इसके बाद स्वामी ने थ्रेचर से कहा की वो अपने फ्यूचर के बारे में जो भी पूछना चाहती है तो कागज की टुकड़ो पे लिख के रख दे। थ्रेचर ने ऐसा ही किया इसके बाद स्वामी ध्यान की मुद्रा में बैठ गए और थ्रेचर से कागज पे लिखा एक सवाल मन में पढ़ने को कहा। जैसे ही थ्रेचर ने मन में सवाल पढ़ा स्वामी ने वही सवाल ज्यो का त्यों बोल के सुना दिया। थ्रेचर को थोड़ा अचरज हुआ और इसके बाद थ्रेचर ने एक के बाद एक पांचो सवाल मन में पढ़े और स्वामी ने ज्यो का त्यों सरे सवाल दोहरा दिए।


margaret thatcher

margaret thatcher

अभी तक बेमन से ये सब कर रही थ्रेचर चंद्रा स्वामी में दिलजस्पी लेने लगी और माहौल बनता देख स्वामी सोफे पे पद्मासन लगा कर बैठ गए। उधर नटवर सिंह ये सब गतिविधि के देख कर घबरा रहे थे लेकिन थ्रेचर हर चीज को मूक सहमति देती जा रही थी। थ्रेचर सवाल पूछ रही थी और स्वामी जवाब दे रहे थे। अचनाक स्वामी ने घोषणा कर दी की सूर्यास्त हो गया अब सवालों के जवाब नहीं दे पाएंगे। इस बार थ्रेचर ही थी जिन्होंने अपनी तरफ से स्वामी को पूछा की वो अगली बार कब मिल सकती है। इस बार स्वामी ने शांत स्वर से नटवर सिंह से कहा इनको बोल दो मंगवार की दोपहर नटवर सिंह के घर पर।

इस बार स्वामी ने शांत स्वर से नटवर सिंह से कहा इनको बोल दो मंगवार की दोपहर नटवर सिंह के घर पर। इस पर नटवर सिंह बोखला गए और स्वामी से कहा की ये इंडिया नहीं है और यहाँ किसी से बिना जाने ऐसे बात नहीं कह सकते। चंद्रा स्वामी से शांत स्वर में नटवर सिंह से कहा आप बस अनुवाद कर दीजिये फिर देखना। जैसे ही नटवर ने ये बात थ्रेचर को बताई वो झट से तैयार हो गयी और नटवर सिंह से घर का पता ले लिया। इसके बाद स्वामी नई थ्रेचर को एक ताबीज दिया। फिर नटवर सिंह बताते है की तय दिन पे थ्रेचर नटवर सिंह के घर पहुंची और उन्होंने वही ताबीज पहन रखा था तो स्वामी ने उनको दिया था। उस दिन थ्रेचर ने अपने मन की इच्छा चंद्रा स्वामी हो बताई और पूछा की में प्रधानमंत्री कब बनूँगी। स्वामी ने जवाब दिया की अगले तीन या चार साल में। इसके बाद स्वामी ने एक और भविष्यवाणी की थ्रेचर नौ , ग्यारह या तेरह साल के लिए प्रधानमंत्री बनेगी और आचर्यजनक रूप से ये बात भी सच साबित हुयी 1979 में वो प्रधानमंत्री बानी और 1990 तक रही यानि पुरे ग्यारह साल।

कुछ ऐसा ही जादू स्वामी ने ब्रूनेई के सुल्तान पर भी चलाया था। सत्ता और विपक्ष दोनों जगह उनकी पेठ थी इसलिए उन्होंने 1993 में रामजन्मभूमि मामले में मध्यस्था भी निभाई।

साल 1995 में बबलू श्रीवास्तव नाम के माफिया की गिरफ्तारी हुयी जो कभी दाऊद इब्राहिम का साथी हुआ करता था। पुलिस से पूछताश के बबलू ने एक चौकाने वाला खुलासा किया और उसने बताया की 1989 में दाऊद ने स्वामी को एक बड़ी रकम दी थी जिसे हवाला के रस्ते स्वामी ने खपाया। इसी बीस स्वामी पे दाऊद और अदनान खशोगी के बिच हथियारों की डील के लिए बिचोलिये की भूमिका निभाने का आरोप भी लग गया।

Chandra Swami

Chandra Swami

बबलू ने बताया की चंद्रा स्वामी की ग्रह मंत्रालय में पहुंच के चलते सब मामले दबा दिए गए थे। गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट जिसे वोहरा कमेटी के सामने पेश किया गया था उसमे भी दाऊद और स्वामी के रिश्तो की बात कही गयी थी। इन सब के बावजूद अपने राजनैतिक राशूक़ के चलते स्वामी पे कोई कार्यवाही नहीं हुयी। बबलू ने साथ ही साथ स्वामी पे कुछ और आरोप भी लगाए उसके अनुसार स्वामी के कहने पे जनाधार पत्रिका के मालिक की कार में बम लगाया और दो साधुओ नारायण और नित्यानद मुनि का अपरहण किया।

स्वामी की पहुंच प्रधानमंत्री तक थी इसलिए उनपे किसी ने हाथ नहीं डाला। लेकिन 1995 में जब कांग्रेस में अंदरूनी उठापटक तेज हुयी तब कांग्रेस के गृह राज्य मंत्री राजेश पाइलट ने सीबीआई को चंद्रा स्वामी के गिरफ्तारी के आदेश दे दिए। 1995 में इंग्लैंड के गुजरती व्यापारी लखु भाई पाठक ने स्वामी पर एक लाख पौंड की ठगी का आरोप लगा दिया और इसके बाद ही राजनेताओ को अपनी जेब में रखने वाले स्वामी की उलटी गिनती शरू हुयी।

राजीव गाँधी के हत्या में फंडिंग के आरोप भी स्वामी पे लगे। 23 मई 2017 को भारतीय राजनीती के सबसे विवादस्पद किरदारों में से एक तांत्रिक चंद्रा स्वामी को मर्त्यु हो गयी। 

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